जेल जाने से बाल बाल बचे पुष्पा 2 के अल्लू अर्जुन: पुष्पा 2 की सफलता के बीच हाई कोर्ट से मिली अंतरिम जमानत

Pushpa 2 bhagdad

तेलुगु सुपरस्टार अल्लू अर्जुन, जो पुष्पा 2: द रूल की ऐतिहासिक सफलता का आनंद ले रहे हैं, अब एक गंभीर विवाद में घिर गए,और जेल जाने से बाल बाल बचे हैं। पुष्पा 2 ने पिछले शुक्रवार को रिलीज़ होते ही बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया, लेकिन इसके प्रमोशनल इवेंट के दौरान हुई भगदड़ और उसमें एक महिला की मौत के मामले ने उनकी छवि को सवालों के घेरे में ला दिया है। तेलंगाना हाई कोर्ट ने इस मामले में अल्लू अर्जुन को अंतरिम जमानत दी है, लेकिन यह विवाद उनकी लोकप्रियता और स्टारडम पर असर डाल सकता है।

पुष्पा 2 की रिकॉर्डतोड़ सफलता

पुष्पा 2: द रूल ने रिलीज़ के साथ ही सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। फिल्म ने पहले वीकेंड में ही ₹400 करोड़ से अधिक का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया है और दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया पाई है। पुष्पा फ्रेंचाइज़ी की लोकप्रियता, अर्जुन का दमदार अभिनय, और फिल्म के गाने व एक्शन सीक्वेंस ने इसे साल की सबसे बड़ी हिट बना दिया है।

लेकिन इसी जश्न के बीच, 4 दिसंबर को हैदराबाद के संध्या थिएटर में हुए हादसे ने इस सफलता पर एक सवालिया निशान लगा दिया है।

घटना जिसने फैंस को झकझोर दिया

अल्लू अर्जुन के फैंस, जो पुष्पा 2 की सफलता का जश्न मना रहे थे, इस घटना से गहरे सदमे में हैं। प्रमोशनल इवेंट के दौरान थिएटर के बाहर जमा हजारों की भीड़ ने नियंत्रण खो दिया, जिसके कारण भगदड़ हुई। इस हादसे में 30 वर्षीय महिला की जान चली गई, और उसका 7 वर्षीय बेटा गंभीर रूप से घायल है।

फैंस के दिलों में सवाल उठ रहे हैं: क्या इस घटना की जिम्मेदारी सीधे तौर पर अल्लू अर्जुन पर डाली जा सकती है, या यह सिर्फ एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसा था?

क्या है पूरा मामला

11 दिसंबर को संध्या थियेटर में पुष्पा 2 के प्रीमियर के दौरान एक भयंकर भगदड़ के कारण पैदा हुई त्रासदी मैं एक महिला की जान चली गई।महिला का नाम एम. रेवती बताया गया, जबकि उनका 9 साल का बेटा भी गंभीर हालत में है। यह दर्दनाक घटना उस समय हुई जब अल्लू अर्जुन पुष्पा 2 के प्रीमियर के लिए थिएटर में मौजूद थे। इस घटना के बाद, यह सवाल उठने लगे कि क्या अल्लू अर्जुन इस त्रासदी के लिए जिम्मेदार थे?

तेलंगाना उच्च न्यायालय में अल्लू अर्जुन द्वारा दायर एक याचिका की सुनवाई की गई, जिसमें उन्होंने चिकलदपल्ली पुलिस स्टेशन द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई एफआईआर को रद्द करने की मांग की थी। एफआईआर में उन पर हत्या की कोशिश और गंभीर चोट पहुंचाने का आरोप लगाया गया था, जो रेवती के परिवार की शिकायत पर आधारित था। हालांकि, अल्लू अर्जुन की कानूनी टीम ने इस आरोप का पूरी तरह से खंडन किया, और कहा कि कोई अपराधी इरादा नहीं था। उनका तर्क था कि रेवती की दुखद मौत एक अप्रत्याशित भगदड़ के कारण हुई, न कि किसी जानबूझकर अपराध या लापरवाही से।

पुलिस का कहना था कि अल्लू अर्जुन की उपस्थिति के कारण भगदड़ हुई, क्योंकि उन्हें पहले से सूचना नहीं दी गई थी, जिसके कारण भीड़ पर नियंत्रण नहीं हो सका। हालांकि, अर्जुन के वकील ने इस तर्क को पूरी तरह से नकारते हुए कहा कि पुलिस को पहले ही सूचित किया गया था और कोई जानबूझकर नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं था। वकील ने यह भी बताया कि भगदड़ के दौरान अल्लू अर्जुन का कहीं कोई सक्रिय हस्तक्षेप नहीं था और वह थिएटर के पहले मंजिल पर थे, जबकि महिला की मौत निचली मंजिल पर हुई, जहां भारी भीड़ जमा थी।

इस घटना ने बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में भी एक पुराने मामले की याद दिलाई, जब बॉलीवुड के शाहरुख खान को भी एक प्रमोशन के दौरान हुई भगदड़ के बाद हत्या की कोशिश के आरोपों का सामना करना पड़ा था। हालांकि, गुजरात उच्च न्यायालय और सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें राहत दी थी। वकील ने अल्लू अर्जुन के मामले में भी इसी तरह की स्थिति को उजागर करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं बड़े सार्वजनिक आयोजनों में अक्सर घटित होती हैं, और इन्हें हत्या की कोशिश के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

अल्लू अर्जुन के प्रशंसकों के लिए यह एक चिंतन का विषय है, क्योंकि उनका प्यारा सितारा न केवल इस त्रासदी के बाद शोक में डूबा है, बल्कि कानूनी जांच के दायरे में भी है। लेकिन यह समझना भी जरूरी है कि अर्जुन का इस घटना में कोई दोष नहीं था। पुष्पा 2 पहले ही एक बड़ी सफलता बन चुकी है और इस त्रासदी को उनके करियर या फिल्म की सफलता पर असर नहीं डालने देना चाहिए। यह घटना दर्शाती है कि ऐसे आयोजनों में भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा की व्यवस्था बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में इस तरह की कोई और त्रासदी न हो।

अल्लू अर्जुन और उनकी फैन फॉलोइंग के लिए यह कठिन समय है, लेकिन यह घटना हमें यह याद दिलाती है कि किसी भी स्थिति में जिम्मेदारी और सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता है।

हाई कोर्ट का फैसला और अल्लू अर्जुन की प्रतिक्रिया

अल्लू अर्जुन ने घटना के बाद अपना गहरा दुख व्यक्त किया है और पीड़ित परिवार की मदद का आश्वासन दिया है। हालांकि, उनके खिलाफ गैर-इरादतन हत्या और लापरवाही के आरोप लगाए गए हैं। तेलंगाना हाई कोर्ट ने उन्हें चार हफ्तों की अंतरिम जमानत दी है, लेकिन जांच के दौरान उन्हें पूरा सहयोग करने का निर्देश दिया गया है।

अदालत में अर्जुन के वकील ने दलील दी कि यह घटना अप्रत्याशित थी और उनके मुवक्किल का इसमें कोई सीधा हाथ नहीं है। अर्जुन केवल बालकनी से फैंस का अभिवादन कर रहे थे, जबकि भगदड़ नीचे हुई।

फैंस की भावनाएं और सवाल

अल्लू अर्जुन के फैंस इस समय भावनात्मक दुविधा में हैं। एक तरफ वे पुष्पा 2 की सफलता का जश्न मना रहे हैं, तो दूसरी तरफ इस हादसे ने उनकी खुशी को कड़वाहट में बदल दिया है। सोशल मीडिया पर अर्जुन के समर्थन में फैंस का सैलाब उमड़ पड़ा है, लेकिन कुछ आलोचकों का मानना है कि इस घटना का असर उनकी छवि और करियर पर पड़ सकता है।

क्या यह विवाद पुष्पा 2 की सफलता को छू पाएगा?

हालांकि, फिल्म ट्रेड एनालिस्ट्स का मानना है कि पुष्पा 2 की अपार सफलता के आगे यह विवाद ज्यादा असर नहीं डाल पाएगा। फिल्म की कहानी, म्यूजिक और अर्जुन का दमदार परफॉर्मेंस फैंस को सिनेमाघरों तक खींच रहा है।

फिर भी, इस घटना ने यह सवाल जरूर खड़ा किया है कि स्टारडम के साथ जुड़ी जिम्मेदारियों को लेकर अभिनेताओं को और सतर्क होने की जरूरत है।

फैंस के लिए भावुक अपील

अल्लू अर्जुन ने हमेशा अपने फैंस के लिए बड़े दिल से काम किया है, और यह घटना उनके लिए भी व्यक्तिगत रूप से बेहद तकलीफदेह है। फैंस का प्यार और समर्थन इस मुश्किल घड़ी में उनके लिए बेहद अहम होगा।

आपकी राय क्या है?

क्या आप मानते हैं कि यह घटना अल्लू अर्जुन की छवि को प्रभावित करेगी, या उनके फैंस का अटूट प्यार हर चुनौती को पार कर जाएगा? क्या पुष्पा 2 की ऐतिहासिक सफलता इस विवाद को पीछे छोड़ पाएगी? नीचे कमेंट में अपनी राय बताएं।

The Rise of Tollywood:Pushpa 2: The Rule Dominates the Box Office

हाल के कुछ वर्षों में, टॉलीवूड ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में एक बड़ी हलचल मचाई है और बॉलीवुड की लंबे समय से चली आ रही dominance को चुनौती दी। इस बदलाव में सबसे बड़ी फिल्म Pushpa 2: The Rule उभर कर निकली। सुकुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में Allu Arjun, Rashmika Mandanna और Fahadh Faasil मुख्य भूमिका में हैं। Pushpa 2 ने अपने तीसरे दिन ₹379 करोड़ का box office collection का रिकॉर्ड तोड़ा है। यह फिल्म टॉलीवूड के भारतीय सिनेमा में एक प्रमुख ताकत बनने के एक महत्वपूर्ण मोड़ को दर्शाती है।The Rise of Tollywood: Pushpa 2

How Pushpa 2: The Rule is Contributing to the Rise of Tollywood

Pushpa 2: The Rule सिर्फ Pushpa: The Rise का sequel नहीं है, बल्कि यह टॉलीवूड के बढ़ते influence का एक बड़ा बयान है। यह फिल्म अपने पूर्ववर्ती से जहां छोड़ी थी, वहीं से आगे बढ़ती है, जिसमें Pushpa Raj (Allu Arjun) एक powerful red sanders smuggler के रूप में अपनी journey जारी रखता है और पारिवारिक संघर्षों और निर्दयी SP Bhanwar Singh Shekhawat (Fahadh Faasil) का सामना करता है।

Why Pushpa 2 is Dominating the Box Office

1. Strong Storytelling with Mass Appeal

Pushpa 2 की असली ताकत इसकी compelling story में है। यह फिल्म intense action, deep emotions और larger-than-life characters का बेहतरीन मिश्रण है। Allu Arjun का Pushpa Raj का किरदार पूरे India में एक विशाल fanbase बना चुका है, क्योंकि उनका सम्मान पाने की journey दर्शकों से जुड़ी हुई है।

2. Allu Arjun’s Stellar Performance

Allu Arjun की Pushpa Raj के किरदार में पूरी तरह से समर्पण film में साफ दिखाई देता है। इस sequel में Pushpa का किरदार ज्यादा आत्मविश्वासी और भावनात्मक रूप से strong दिखता है, जिससे दर्शकों को उससे जुड़ने में मदद मिलती है। उनकी मशहूर line “Thaggede Le” (I won’t back down) अब एक catchphrase बन चुकी है, जो उन्हें एक superstar के रूप में स्थापित करती है।

3. Massive Action and Emotional Stakes

Pushpa 2 में action sequences दर्शकों को thrill करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, लेकिन फिल्म असल में तब चमकती है जब यह Pushpa के emotional journey को दिखाती है। उसका past, उसका trauma, और Srivalli (Rashmika Mandanna) के साथ उसका संबंध कहानी में high stakes बनाते हैं, भले ही fight scenes मुख्य स्थान पर हों।

4. Pan-India Appeal

Pushpa 2 की success के पीछे सबसे महत्वपूर्ण कारण इसकी pan-India release है। इस फिल्म ने regional boundaries को पार करते हुए पूरे India से दर्शकों को आकर्षित किया है। टॉलीवूड की South India से बाहर बढ़ती हुई popularity Bollywood की dominance को चुनौती दे रही है।

Tollywood’s Growing Influence: How It’s Shaping Indian Cinema

पिछले कुछ वर्षों में, टॉलीवूड ने धीरे-धीरे अपनी पकड़ बनाई है, जहां RRR और KGF जैसी फिल्मों ने इसका मार्ग प्रशस्त किया है। Pushpa 2: The Rule इस trend को आगे बढ़ाता है, यह साबित करता है कि टॉलीवूड बॉलीवुड की बड़ी फिल्मों को टक्कर दे सकता है।

1. Fresh Content Over Formulaic Scripts

बॉलीवुड अक्सर formula-based scripts और अनुमानित कहानियों पर निर्भर करता है, जबकि टॉलीवूड fresh और innovative content पेश कर रहा है। Pushpa 2 अपनी देहाती कहानी और जटिल किरदारों के अद्भुत मिश्रण के साथ यह दर्शाता है कि कैसे टॉलीवूड ने पूरे भारत में दर्शकों को जीत लिया है।

2. Character-Driven Narratives and Strong Performances

टॉलीवूड किरदारों के development और शानदार performances पर जोर देता है, जो दर्शकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बनता है। Allu Arjun का Pushpa Raj का किरदार गहरे और संवेदनशील पहलुओं को उजागर करता है, जो उसे और भी दिलचस्प बनाता है, जबकि बॉलीवुड की अधिकांश फिल्में star power पर निर्भर रहती हैं।

3. Box Office Records and Global Reach

Pushpa 2 एक बड़े trend का हिस्सा है, जिसमें टॉलीवूड की फिल्में न केवल भारत में, बल्कि global level पर भी records तोड़ रही हैं। RRR, KGF और अब Pushpa 2 की success यह दर्शाती है कि South Indian cinema अब global stage पर एक मजबूत ताकत बन चुका है।

The Future of Tollywood: Can Bollywood Keep Up?

Pushpa 2 जैसी फिल्मों के साथ, टॉलीवूड अब न केवल बॉक्स ऑफिस पर बॉलीवुड को चुनौती दे रहा है, बल्कि कहानी कहने, अभिनय और एक्शन के मामलों में भी leadership कर रहा है। बॉलीवुड को अब नए दर्शकों की पसंद के अनुसार खुद को ढालने की challenge का सामना करना पड़ रहा है, क्योंकि दर्शक अब टॉलीवूड की ताजगी और bold कहानियों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

जब Pushpa 2: The Rule बॉक्स ऑफिस पर राज कर रही है, तो यह तो बस शुरुआत है। Pushpa 3: The Rampage पहले से ही तैयार हो रही है, और टॉलीवूड अपनी बढ़त को बनाए रखने के लिए तैयार है, जिससे बॉलीवुड को अपनी निर्माण प्रक्रिया पर फिर से विचार करना पड़ेगा।

Conclusion

Pushpa 2: The Rule टॉलीवूड के लिए एक महत्वपूर्ण milestone है, न केवल बॉक्स ऑफिस सफलता के मामले में, बल्कि global audiences को आकर्षित करने की क्षमता में भी। इसकी दिलचस्प किरदारों, मजबूत प्रदर्शन और भावनात्मक कहानी के कारण, Pushpa 2 यह साबित करता है कि टॉलीवूड अब भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में बॉलीवुड से आगे निकल चुका है। यह success टॉलीवूड के बढ़ते influence का प्रमाण है, और जैसे-जैसे यह अपनी सीमाओं को बढ़ाता है, बॉलीवुड को अपनी गति बनाए रखने के लिए अनुकूलन करना होगा।

Pushpa 2 rampage begins on Book My Show

Pushpa 2 rampage begins on Book My Show:Breaks record of Kalki: Release date 05th December


Releasing on 5th December

बस कुछ ही दिन बचे हैं! अल्लू अर्जुन और रश्मिका मंदाना एक बार फिर बड़े पर्दे पर धमाका करने आ रहे हैं अपनी बहुप्रतीक्षित फिल्म पुष्पा 2: द रूल के साथ। यह फिल्म 5 दिसंबर 2024 को रिलीज़ हो रही है, और रिलीज़ से पहले ही रिकॉर्ड तोड़ने की चर्चा जोरों पर है।

खबर है कि पुष्पा 2 पहले ही दिन ₹300 करोड़ से ज्यादा की कमाई करने वाली पहली भारतीय फिल्म बन सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में पहले दिन ₹233 करोड़ का कलेक्शन हो सकता है। इसमें से आंध्र प्रदेश और तेलंगाना अकेले ₹105 करोड़ तक का कलेक्शन दे सकते हैं। कर्नाटक से ₹20 करोड़, तमिलनाडु से ₹15 करोड़ और केरल से ₹8 करोड़ की कमाई का अनुमान है। वहीं, भारत के बाकी हिस्सों से ₹85 करोड़ आने की उम्मीद है।

अमेरिका में भी फिल्म का जबरदस्त क्रेज देखने को मिल रहा है। एडवांस बुकिंग ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, और विदेशों से पहले दिन ₹70 करोड़ की कमाई का अनुमान है। कुल मिलाकर, पहले दिन ₹303 करोड़ की धमाकेदार कमाई की उम्मीद है, जो इतिहास रच सकता है।

फिल्म पर दर्शकों का पूरा ध्यान खींचने और बॉक्स ऑफिस पर कोई टक्कर न हो, इसके लिए फिल्म को गुरुवार को रिलीज़ करने का फैसला लिया गया है।

सुकुमार के निर्देशन में बनी इस फिल्म में अल्लू अर्जुन फिर से पुष्पा राज के किरदार में लौट रहे हैं। यह कहानी उस मजदूर की है, जो मेहनत और हिम्मत के बल पर चंदन की लकड़ी का तस्कर बनकर नई ऊंचाइयों तक पहुंचता है। पुष्पा: द राइज की सफलता के बाद, फैंस इस सीक्वल को लेकर बेहद उत्साहित हैं।

तो कैलेंडर पर 5 दिसंबर की तारीख को मार्क कर लीजिए, क्योंकि पुष्पा राज का जलवा हर थिएटर में गूंजने वाला है। क्या आप तैयार हैं इस धमाके को देखने के लिए?

In 8500+ Screens in India (92% of Total Screens)…Record Numbers Loading…

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मुंबई: बदलते रूप,अनगिनत कहानियां

मुंबई एक ऐसा शहर है जो हर पल एक नया रूप धारण करता है। इसकी कोई एक परिभाषा नहीं हो सकती। यह एक अवधारणा की तरह है, जो सपनों और इच्छाओं को उसी गति से रचता और तोड़ता है जैसे इसकी लोकल ट्रेनें दौड़ती हैं।

पायल कपाड़िया की फिल्म (All We Imagine As Light) ऑल वी इमैजिन ऐज़ लाइट “मैक्सिमम सिटी” का एक अंतरंग और गहराई से देखा गया चित्रण है। लेकिन यह फिल्म मुंबई के रोमांटिक और महिमामंडित दृष्टिकोण को छोड़ देती है। फिल्म के शुरुआती दृश्यों में कपाड़िया मुंबई को संघर्ष का प्रतीक, एक चकाचौंध भरा सपना और एक ऐसा मृगतृष्णा प्रस्तुत करती हैं, जो जितना देती है, उससे कहीं अधिक छीन लेती है।

सामाजिक वर्गों की कहानियों से होती है शुरुआत
फिल्म की शुरुआत वर्किंग क्लास के बेनाम आवाज़ों से होती है, जो अपने-अपने मुंबई अनुभवों को साझा करते हैं। कोई कहता है कि दो दशकों तक यहां रहने के बावजूद, वह इसे अपना घर कहने से डरता है क्योंकि वह कभी भी यहां से निकलने को मजबूर हो सकता है। एक और व्यक्ति याद करता है कि जब वह पहली बार मुंबई आया था, तो मछलियों की बदबू के कारण रातभर सो नहीं पाया था।

जल्द ही फिल्म दो मलयाली नर्सों पर केंद्रित हो जाती है—प्रभा (कानी कुसरुति) और अनु (दिव्या प्रभा)। प्रभा, 30 की उम्र पार कर चुकी, खिड़की के पास खड़ी होकर रात के अंधेरे में खोई हुई है। दूसरी ओर, उसकी युवा रूममेट अनु सीट पर लेटी हुई दिनभर की थकावट मिटा रही है।

दो किरदार, दो अलग व्यक्तित्व
प्रभा और अनु उम्र ही नहीं, अपने व्यक्तित्व, इतिहास और रहस्यों में भी एकदम अलग हैं। प्रभा एक जिम्मेदार और शांत स्वभाव की महिला है, जो अपने अलग हो चुके पति की अनुपस्थिति से जूझ रही है। दूसरी तरफ, अनु युवा और साहसी है, जो एक मुस्लिम लड़के शियाज़ (ह्रिदु हारून) के साथ गुप्त रिश्ते में है और मुंबई की अनदेखी में इसे निभा रही है।

मुंबई से कोंकण के बीच बदलता परिदृश्य
118 मिनट की इस फिल्म का पहला भाग मुंबई के संघर्ष को दिखाता है। इंटरवल के बाद, फिल्म कोंकण के समुद्र तट गांव में स्थानांतरित होती है। पुनर्वास के कारण शहर छोड़ने को मजबूर परवती (छाया कदम) अपनी सहायक प्रभा और अनु के साथ गांव लौट जाती है। मुंबई की हलचल से विपरीत, इस शांत गांव में उन्हें वह स्वतंत्रता मिलती है जिसकी तलाश वे लंबे समय से कर रही थीं।

भावनाओं और राजनीति का कच्चा सच
फिल्म मुंबई की आत्मा में गहराई से जड़ें जमाए हुए है, लेकिन इसमें वैश्विक दृष्टिकोण भी झलकता है। यह एक सिनेमाई अनुभव है जो मीर नायर की फिल्मों की तरह कच्चा और निर्भीक राजनीतिक टिप्पणी से भरा है।

रणबीर दास की सिनेमैटोग्राफी और क्लेमेंट पिंटो की एडिटिंग इतनी तरल है कि दृश्य एक-दूसरे में घुल जाते हैं। प्रभा का अपने पति से बिना बात किए एक साल बाद एक राइस कुकर गिफ्ट मिलने का दृश्य दिल को छू जाता है। इसी तरह, समुद्र तट पर एक अजनबी से प्रभा की बातचीत उसे असली और कल्पना के बीच लाकर खड़ा कर देती है।

फिल्म का सशक्त संदेश
फिल्म का सबसे शक्तिशाली क्षण तब आता है जब अनु एक बुर्के का उपयोग अपनी यौन स्वतंत्रता को व्यक्त करने के लिए करती है। शियाज़ के घर में अकेले समय बिताने के लिए वह इसका इस्तेमाल करती है। हालांकि योजना असफल होती है, लेकिन उनकी अंतर्धार्मिक प्रेम कहानी दर्शकों के दिलों में गहरी छाप छोड़ जाती है।

पायल कपाड़िया ने साधारण चीज़ों में असाधारणता खोजने की कला में महारत हासिल की है। ऑल वी इमैजिन ऐज़ लाइट न केवल भारतीय सिनेमा का उत्कृष्ट उदाहरण है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खूब सराहा जा रहा है।

अंतत:-
2024 के अंत तक, यह फिल्म भारतीय सिनेमा में बदलाव की एक मिसाल है। इसकी निर्भीकता, कथा की सादगी और भावनात्मक गहराई इसे दर्शकों के दिलों में एक स्थायी स्थान देती है। यह फिल्म दर्शकों को यह याद दिलाती है कि भारतीय प्रतिभा को पहचानने के लिए विदेशी प्रशंसा की आवश्यकता क्यों नहीं होनी चाहिए।

Article by M.darshan

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